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नर कभी नारी का रुप लेना

*कविता*

तुम क्या? जाने नारी क्या? है
नारी बिना हम सब क्या? है

नारी बिना हम सब कहाँ होगें?
माँ के बिना हम सब कही रोयेगें
माँ के बिना हम सब कही खोयेगें
नारी बिना हम सब कैसे रहेगें?
माँ ना हो तो हम सब कैसे जीयेगें?
नारायणी रुप कैसे देख पाओगें

नारी बिना संसार कैसे चलेगा?
बच्चों का भविष्य कैसे दिखेगा?
नारी बिना शृंगार कैसे खिलेगा?
नर जाति विनाश हो जायेगा
ना होने पर सब खत्म हो जायेगा

कुटिया का उजाला कैसे आयेगा?
परिवार में खुशियाँ कहाँ से आयेगा?

जहाँ देखो,वहाँ नारी का प्यार है
जहाँ सुनो,वहाँ नारी का आभार है
नारी ही सबका दरबार है
नारी ही सबका घरबार है

नारी वीरों की जवानी है
माँ का रुप जैसा न्यारी है
रुप में सबसे प्यारी है
दिल में सबकी अवतारी है
शक्तियों में नारी महाकाली है

जन्म देती है बच्चों को
सह लेती है पीड़ों को
दर्द लेती है सीनें मे
छुपा लेती है सहने में

मज़ाक उड़ा देते हो, नारी को
समझ ना पाते हो,महाकाली को

रचयिता:रामअवध



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