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गुरु,माँ-बाप

*कविता* गुरु,माँ-बाप

गुरु बिना कोई मार्ग नही
संघर्ष बिना कोई ज्ञान नही
बिना कोशिश की कोई राह नही
राह बिना ज़िंदगी में कोई बात नही

माँ बिना कोई जान नही
बाप बिना कोई राहत नही

भविष्य की राह हमें दिखाते है
स्वयं का अनुभव हमें सीखाते है
ज्ञान की रेखा हमें बताते है
ज़िंदगी की राह हमें दिखाते है

डगर की सच्चाई हमें बताते है
बिना मेहनत का रंग हमें दिखाते है
साहस की बात हमें सीखाते है
वक्त की रफ्तार हमें बताते है

लक्ष्य की ओर हमे बढ़ाते है
संघर्ष की बात हमें सीखाते है
अपना ज्ञान हमें बाँटते थे
जीवन की राह हमें दिखाते थे

गुरु बिना ये भाग्य कहाँ है?
ज़िंदगी में ऐसी राह कहाँ है?
गुरु जैसी ज्ञान कहाँ मिलता है?
ज़िंदगी ऐसी रात कहाँ ढलता है?

रचयिता:रामअवध


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