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हिंसा के पीछे दानव है

*कविता*

मानव अब दानव बना है
हिंसा के पीछे पागल बना है

भारत माँ का आज रक्त बहा है
आँचल में माँ का खून दहा है
नयनों में आज माँ नूर बहा है
दिल में आज माँ का खून दहा है

हिंसा के चपेट में बेकसूर मरे
देश की रक्षा में नौजवान जले
भारत के नाम पर ये वीर जले
शहीदों के नाम पर ये देश मरे

जलते हुए ये आसमान दिखे
हिंसा के पीछे ये दानव दिखे
रक्त के चपेट में बेकसूर दिखे
हिंसा के आगे ये दानव दिखे

भारत माँ की आँचल ये खून जले
शहादत के नाम पर अमर ज्योति जले
देश की रक्षा में ये आसमान दिखे
शहीदों की लपेट में ये तिरंगा दिखे

रचयिता:रामअवध


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