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जिंदगी का रण

*कविता*ज़िंदगी का रण

ज़िंदगी का रण होगा
जिंदगी के संग होगा

नींद को त्याग कर
इतिहास बना दूँगा
चाहत को रख कर
हिम्मत बना दूँगा

कब?-तक इतिहास मुझसे दूर जायेगा
कभी तो मेरे करीब से गुजर आयेगा
वर्षों की छाया मुझ पर कब? छायेगा
इतिहास मेरा कब? बनकर आयेगा
मेरे सपनें को कब? सजा पायेगा
जिन्दगी की डगैरा कब? दिखा पायेगा

अपना भी इतिहास होगा
गुंजता हुआ आवाज होगा
देश मेरे को उछाल देगा
कभी तो मुझे पुकार देगा

सच्चे सपनें का दिन होगा
मौसम में लहरता गुण होगा
जिंदगी में ऐसा रण होगा
इतिहास में ऐसा गण होगा
ज़िंदगी से लड़ता मेरा रण होगा

कभी तो सपना सच होगा
तभी तो ज़िंदगी का रंग होगा
इतिहास मेरा सबके संग होगा
गुंजते हुआ आवाज मेरा रण होगा

रचयिता:रामअवध


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