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संवाददाता बना यंत्र

कविता*संवाददाता बना यंत्र

क्षणभर में संवाद जाने लगा
पलभर में संवाद आने लगा
यंत्रों पर वार्तालाप आने लगा
पत्रों का ज़माना अब जाने लगा

यंत्रों पर सारा सुविधा आने लगा
दूरियाँ भी अब मिटाने लगा
संवाद अब यंत्रों पर आने लगा
सोशल मिडिया पर आने लगा

कागज पर लिखा पत्र नही चला
ज़माना अब कितना बदलने चला
संवाददाता बनकर यंत्र चलने लगा
सोशल मिडिया पर अब आने लगा

पलभर की ख़बर क्षणभर ले लेते है
यंत्रों पर संदेश बनकर चल दे देते है
सोशल मिडिया बन चूँकि है संवाद
क्षणभर में आ चुँकि है आवाज

ज़माना आगे बढ़ गया
इंसान नीचे घिच गया
संसार पीछे झुक गया
इंसान आगे लूक गया

भाव  वाली बात रुक गयी
ज़माना कितना झुक गयी

रचयिता:रामअवध


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