दूर है मेरा घर

*कविता*दूर है मेरा घर

खूब दूर जाना है,घर के नजदीक आना है
इरादा खूब है,समय के नजदीक जाना है

ख्वाबों में तसवीर बनकर आती है
जिंदगी में नसीब बनकर जाती है
दूर होकर ऐसी चाहत बना जाती है
प्रेम की जिंदगी हमे सीखा जाती है

सफ़र इतना दूर है हम जा नही सकते
घर इतना पास है कि हम जा नही सकते
प्यार इतना है हम बुला नही सकते
गाँव की यादें,ओर घर को भूला नही सकते

उम्मीद रख दी,घर की यादों में
तड़प गया दिल,गाँव की चाहत में
सो गया दिल,घर की यादों में
रो गया दिल,गाँव की बातों में

छोड़कर आ आया,गाँव की चाहत को
मोड़कर आ गया,माँ की आँचल को
मुड़कर आ गया,शहर की द्वार ओर
खुद को मोड़ दिया,शहर की दीवार ओर

घर की ओर सोचनें दो
उसकी यादों को मोड़ने दो
चाहत की याद रखने दो
ईश्वर को आज कहने दो

रचयिता:रामअवध




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