कुछ करुँगा

*कविता*

निराशा से भरी मेरी जिंदगी थी
ख़्वाब से भरी मेरी कहानी थी
आँखों से भरी मेरी जिंदगी थी
यादों से भरी मेरी जवानी थी

अंहकार का तोड़ तो आयेगा
तेरा दर्पण तुझे ही दिखायेगा
समय का मार सह ना पायेगा
बीते अतीत को भूल ना पायेगा

मेरी जिंदगी तुझे ऐसी मोड़ पर ले जायेगा
हर तरफ तेरी तन्हाई में याद तुझे दिलायेगा

ज़िंदगी की परवाह कौन?करता है
सच्चाई की बात कौन? बोलता है
झूठे अरमान पर जिंदगी जीते है
ख्वाबों की रात पर कहानी लिखते है

मैं एक दिन ऐसा लिख जाऊँगा
इतिहास ऐसा बनाकर आऊँगा
संसार को याद दिलाकर जाऊँगा
समय का ख़्वाब बनकर चला जाऊँगा

रचयिता:रामअवध

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