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प्रलय ला दी वायरस

*कविता*प्रलय ला दी वायरस

प्रलय की चादर छायी
बचने की आशा आयी
संसार में सन्नाटा छायी
बचने की आशा आयी

छिप जाते है कुटिया में
लहर जाते है दुखिया में
संभल जाते है दुनिया में
संभव आते है देहिया में
गिर जाते है दुनिया में

संसार सन्नाटे में आ गयी है
इस बीमारी से लड़ गयी है
खुद को बचाने लगी है
जिंदगी को संभालने लगी है

मानव-मानव से दूर है
इस बीमारी से चूर है
संसार में ज़िंदगी के नूर है
अतीत में ज़िंदगी हूर है

विपत्ति कैसी बन कर आयी?
संसार को जकड़ कर लायी
मानव को पकड़ कर आयी
संकट का पहाड़ बन कर आयी

संकट में है जग हमारा
देश में है तन्हाई हमारा
दिल में है दुनिया हमारा
जग में है प्यार हमारा

सहारा बनेगें देश के हम
न्यारा बनेगें जग के हम
प्यारा बनेगें जिंदगी के हम
सहारा बनेगें प्यार के हम

हम जीतेगें तो घर बैठकर जीतेगें
हम लड़ेगें तो घर बैठकर ही लड़गें

रचयिता:रामअवध


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