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चंचल दिल आज शांत है

*कविता*चंचल दिल शांत है

धीरे-धीरे बूँदों का टपकना
शहर में पैरों का लपकना
ज़िंदगी में रातों का ढल जाना
सुबह के पल यूँ ही गुजर जाना
ख्वाबों की रात को ढूँढकर आना
ज़हर वाली बाते सुनकर आना

अम्बर से बरसा बादल गरजा नही
ज़िंदगी का क्षणभर कही गुजरा नही
अम्बर से बरसा पानी कही ठहरा नही
चला ढूँढने प्रेम का पल कही मिला नही

चंचल दिल कही ठहरा नही
यादों के प्रेम कही पहरा नही
तनहा दिल कही पसरा नही
जिंदगी के रात में कही अप्सरा नही

कही भी कुछ मिला नही
सुखी की बात कही दिखा नही
जिन्दगी की रात कही ढाला नही
जीवन की सोच में कही डूबा नही

सुनहरी आवाज़ कही सुना नही
पंरिदों की उड़ान कही दिखा नही
गुलशन में कही गुलबदन दिखा नही
मौसम में कही बादल छिपा नही

मन आज शांत है
जिंदगी की रात है

रचयिता:रामअवध


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