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हाथों की चिह्न गलत है

*कविता*

हाथों की चिह्न गलत है
जिंदगी के सामने सच है

बेचैनी वाली एक मुलाक़ात होती है
ज़माने के पीछे एक बात होती है
इन्तजार वाली एक चाहत होती है
राहत वाली एक बरसात होती
ढूँढते पल में,कितने मुलाक़ात होती है

खुशी के पल ढूँढने की जरुरत नही
किसी के पल पर रहने की जरुरत नही
अपनो के आगे रुकने की जरुरत नही
किस्मत के आगे झुकने की जरुरत नही

खुद का निचोड़ लेकर चलना है
खुद को आगे जाकर रहना है
हाथों की चिह्न कुछ गलत बताती है
किस्मत के आगे वही तो झुकाती है

भविष्य का अर्पण कोई नही दिखाता
कवि से अच्छा अर्पण कोई नही बताता
भाव में अपने चाहत का दर्शन दिखाता
कविता में अपने अरमान की राहत दिखाता

जिंदगी भी एक मुलाक़ात है
जिंदगी के पीछे भी एक बात है
हर तरफ अंधरिया रात है
ज़माने के पीछे एक राज़ है

रचयिता:रामअवध

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