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मैं हूँ, या नही हूँ

*कविता*

कौन? अब मेरा दिल बहलायेगा
कौन? मेरे साथ अब रह पायेगा
तेरी यादों में कोई ना सज पायेगा
दिल ऐसे ही तड़प कर मर जायेगा

कौन?मेरी यादों को तेरी यादों में जोड़ पायेगा
जिंदगी की राह अब कौन? मुझे दिख लायेगा

कभी तो वह पल लौटकर आयेगा
मेरे जिंदगी के साथ पल तो गुजारेगा
वही यादों को दोहराकर दिख लाऊँगा
तेरे साथ वही पल बनाकर दिख लाऊँगा

मेरी जिंदगी तेरी जिंदगी में कौन? लौटायेगा
वही पल अब मेरे  साथ कौन? गुज़ार पायेगा

सुन्दर सा मुखड़ा,कहाँ?देख पाऊँगा
तुम्हारी यादों में,कहाँ?रह पाऊँगा
सुन्दरता की व्याख्या नही कर पाऊँगा
जिंदगी तुम्हारे साथ कहाँ?बीता पाऊँगा

डगेरे की रात बेनामी होती है
सवेरे के बाद बदनामी होती है
बसेरे की द्वार बरसाती होती है
घर अब मेरा आसमानी होती है

खुशी का दरवाज़ा अब बन्द हुआ
दिल का दरवाज़ा अब पत्थर हुआ

रचयिता:रामअवध

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