बंजर है ये क्षण

*कविता*बंजर है ये क्षण

नयनों से बूँदे गिरने लगी
दुख की लहर आने लगी
ह्रदय में बजर गिरने लगी
हिम्मत की बात  टूटने लगी

चट्टान से बड़ा खतरा आने लगी
जिंदगी अब बंजर होने लगी
दिन में अँधेरा छाने लगी
ह्रदय की चाहत मिटने लगी

रब  की ख़्वाब हटने लगी
मौत की लहर छाने लगी
ज़िंदगी की रात बताने लगी
हालत मुझे अब सताने लगी

जग में ऐसी कौन? सी लहर आयी
ज़िंदगी में मौत की खबर आयी
पलभर में कोरोना की कहर आयी
कोरोना से बनी ये ज़हर आयी

दिमागी हालत दिख नही है मेरी
ख्वाबों की रात उठी नही है मेरी
ज़माने से रुठी है मेरी ज़िंदगी
ख्वाबों से झूठी है मेरी जिदंगी

कभी तो मौत का अँधेरा जायेगा
कभी तो जिंदगी की बरसात आयेगा
वही तो खुशियों का पल ठहरेगा
वही तो यादों का नगर बसेगा

रचयिता:रामअवध


0 Comments