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होली में झूमना

*कविता*

जहाँ रहना है,वहाँ धूम तो मचायेगे
रंगो में रंगीन होकर झूम तो जायेंगे
प्यार की नगरी में लहर तो हम उठायेगे
खुशियों की बारात तो लेकर हम लायेगें

रंगों में रंगीन होकर आयेगें हम
खुशियों को लेकर आयेगें हम
प्यार की बरसात बरसायेगें हम
साहस की नगरी दौड़ायेगें हम

हँस पड़े हम,खुशियों की लहर में
झूम गये हम,होली की रंगीन-रंग में
रूम गये हम,अपने देश की नगरी में
लूट गये हम,बादलों की  बरसात में

वस्त्र को चिरने चले हम
होली में झूमने चले है हम
लहरों के साथ गुंजने चले है हम
होश में मदहोश बनने चले है हम

आज खुशी की लहर है,झूम लेता हूँ
यादों की बरसात में,झूम लेता हूँ

रचयिता:रामअवध

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