वंचक में संकट

*कविता*

संकट में वंकट दिखता है
जिंदगी में वंचक लिखता है

छोड़कर चला जायेगा दुनिया तुम्हें
याद करेगी लिखी हुई जावानी तुम्हें
शायद लौटा देगी तुम्हारी कहानी तुम्हें
याद दिलवा देगी तुम्हारी कविता तुम्हें

ज्ञान पाकर आ जायेंगे हम
ध्यान लाकर चले जायेंगे हम
सज्ञान बनकर आ जायेंगे हम
माँ चरणों में झुक जायेंगे हम

मैं झुकता हूँ ज्ञान को पाने के लिए
मैं रुकता हूँ जान को गवाने के लिए
मैं झुकता हूँ,शारदे को पाने के लिए
मैं जुटता हूँ,याद दिलवाने के लिए

ज्ञान उन्हीं में आता है
जान जिसमे जाता है
वक्त उसमें लगता है
साहस उसमें भरता है

ये वक्त बड़ा अज्ञानी लगता है
दिल मेरा बड़ा बेज्ञानी लगता है
जिंदगी मेरी बेईमानी लगता है
दिल बड़ा बैचेनी लगती है

दिल मोहनी लगेगा
शरीर रंगोली बनेगा|
वक्त मेरी जोहनी लगेगा
प्यार मेरी सोहनी लगेगा

रचयिता:रामअवध

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