अम्बर की शाम

*कविता* अम्बर की शाम

अम्बर की शाम है
ज़िंदगी की धाम है
लोगों को आराम है
ज़िंदगी को सलाम है

अम्बर में शाम कहाँ ढलता है?
ज़िंदगी में रात कहाँ गुजरता है?

बादल के कदम कभी रुकती नही
चलते हुए कदम कही दिखती नही
गगन की लहर कभी झुकती नही
आसमान पर कही ठिकती नही
पाताल के नीचे कभी दिखती नही

पल भर कही रुकती नही
कल भर कही दिखती नही

देखो आकाश में आज लहर उठी है
कुदरत की माया आज जाग उठी है
चमककर आज बादल बरस चुकी है
देखो भू पर आज सागर बन चुकी है

देखो आज अम्बर नया रुप लाया है
आज अपना सुनहरा दिन दिख लाया है
लहरों के साथ अम्बर ने रंग बताया है
चमकते सूरज को आज चाँद बनाया है

अम्बर आज बवंडर लाया
दिन में आज रात दिखाया
अम्बर में पर आज बिजली चमकी है
किसानों पर आज फुल बरसी है

अम्बर की तारा चमक जाती है
ऊपर देखते हुए पल गुजर जाती है
ब्रह्मांड को देख हुए नींद लग जाती है
ज़िंदगी मेरी कुछ कह जाती है

रचयिता:रामअवध

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