अस्त हूँ,ग्रस्त हूँ

*कविता* अस्त हूँ,ग्रस्त हूँ

मदहोशी में हूँ
ख्वाहिश में नही
पल में हूँ
फ़कीर में नही

दिन में हूँ
रात्रि में नही
क्षण में हूँ
ज़िंदगी में नही

ज़माना मेरा अस्त हुआ
ज़िंदगी मेरा व्यस्त हुआ
हिम्मत मेरा ग्रस्त हुआ
समय मेरा व्यर्थ हुआ

कब?उठा,कब? जागा
कुछ पता ना चला
जिंदगी कब? रुठ गया
कुछ मालूम ना था

अतीत कब? भूल गया
कुछ पता ना था
बचपन कब? खो गया
कुछ ख़बर ना था

जिंदगी की साँस कब?रुठा
कुछ पता ना था
यादों में कब? चाहत आ गया
कुछ ख़बर ना था

खुशियों की लहर को लहराना था
जिंदगी की साँसों कभी ना गवाना

रचयिता:रामअवध

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