माँ की क़दमों में ही ब्रह्मांड

*कविता*माँ की क़दमों में ही ब्रह्मांड

मेरी ज़िंदगी किसी के नाम रखी है
माँ के आँचल में मेरी जान लिखी है
उन्हीं के प्यार मे मेरी शाम दिखी है
माँ के गुणों से मेरी ज्ञान लिखी है
उन्हीं की चरणो में ब्रह्मांड दिखी है
माँ की क़दमों में मेरी जहान लिखी है

चाहे कितना भी बड़ा हो जाऊँ
मैं आपकी कदमों में ही रहूँगा
चाहे में कितना भी दूर चला जाऊँ
मैं आपके दिल में ही बसूँगा

अम्मा के प्यार में मेरी जहान है
उन्हीं की छाया में मेरी पहचान है
उन्हीं की माया में मेरी जान है
माँ की कदमों में मेरी शान है

कुछ बातें कह जाती है
ख्वाबों में दिख जाती है
ज़िंदगी में लिख जाती है
आँचल में सुला जाती है
अपना प्यार दे जाती है

मैं आज भी सोचता हूँ
माँ की यादें आज भी रोकता हूँ
आँचल को आज भी में खोजता हूँ
माँ का प्यार आज भी रखता हूँ

मैं झुकता हूँ यादों में
मैं खोजता हूँ ख़्वाब में

रचयिता:रामअवध


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