future

कहाँ जायेगें हम

*कविता*कहाँ बस जायेगे हम

बचे हुए पल कहाँ बीतायेगें हम?
भाग्य का संकट कहाँ मिटायेगें हम?
छोटी सी जीवन कहाँ बचायेगें हम?
ज़िंदगी का गुलशन कहाँ खिलायेगें हम?

सोचा पलभर के बारे में
लिखा बीते पलों के बारे में
सीखना चाहा ज़िंदगी के बारे में
जोड़ना चाहा पलों के बारे में

बिखरा हुआ लगता है जीवन
अधूरा सा लगता है गुलशन
ज़िंदगी भी पराई एक दुलहन
ना दिखे ऐसा एक झुलसन

संध्या हो रहा था
बैठकर सोच रहा था
पल के बारे में बोल रहा था
पल कहाँ बीताये सोच रहा था

ख़ौफ़ से भागते ज़िंदगी की दौड़ में
हर बार रह जाते है ज़िंदगी की मोड़ पर
बादल कर रह जाते है ज़िंदगी के रोड में
कोशिश करके थक जाता हूँ,जीवन के पल पर

रचयिता:रामअवध





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