future

रोक रहा हूँ ये क्षण

*कविता*रोक रहा हूँ ये क्षण

ढूलक रहे है ये पल
रोक रहा हूँ ये क्षण

हवा की लहरो से मेरी बात होती है
चाँदनी रातों में ही मेरी मुलाक़ात होती है
तारे चमकते है बिंदिया की लाली में
याद आता है कानों झुनझुने की बाली में

क्या?सुनहरी रुप है तुम्हारा
पल की यादों में दिल है तुम्हारा
ज़माने के पीछे आज भी खोता हूँ
तुम्हारी यादों में आज भी रोता हूँ

तुम्हारी नयनों के पल आज भी उड़ते है
मेरे नयनों के सामने आज भी झुकते है
मेरे पल आज भी वही सोता है
तेरी यादों आज भी बोलता है

कब-तक साँसो में तेरी यादे बचाकर रखूँगा?
बीते क्षणों को ज़िंदगी बना कर रखूँगा
अतीत से लाकर दोहरा रहा हूँ
उलझन सी माया से अलग रहा हूँ

जीने की आशा हो तुम
मेरे पल में आधा हो तुम
तुम्हारे आने से ये पल जाग उठेगा
तुम्हारे ना होने से ये पल दाग जायेगा

रचयिता:रामअवध





Post a Comment

0 Comments