नशा है इस क्षण में

*कविता* नशा है इस क्षण में

आशा नही रही मेरी बातों में
नशा नही रही मेरी आँखों में

भटक जाता हूँ इन्हीं गलियों में
ठहर जाता हूँ इन्हीं कवियों में
जिंदगी बातें मेरी हसीन है
ज़िंदगी राज़ मेरी जमीन है

मेरे पल में कोई साथ नही है
जिंदगी की बातों में राज़ नही है
किसी का पल मेरे हवाले नही है
ज़िंदगी की मुलाकात ये नही है

उछालने की उदार मत रखना
उदासी की मुलाकात मत रखना
क्षणभर यूँ ही बदल कर रह जाती है
हर पल यूँ ही बरस कर रह जाती है

तमाम उम्मीद की चाहत है
चाहत में ऐसी मुलाकात है
मन करा,कही ठहर जाऊँ
यादों में,कही बरस जाऊँ

चलते कदम अब ठहर गये
ढलते कलम अब गहर गये
जीवन की उदासी मेरी तक़दीर है
बीते यादों की उनासी मेरी इकरार है

रचयिता:रामअवध






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