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खेतिहर का रंग आयी

*कविता* खेतिहर का रंग आयी है

ज़िंदगी की भौंर अब आयेगी
ज़िंदगी के संग अब जायेगी
ख्वाहिश लेकर अब आयेगी
ज़िंदगी बनाकर अब जायेगी

मेहनत की रंगीन फसल छायी है
ख्वाहिश की नींद अब आयी है

खेतिहर के दिल में,ये बात समा गयी
चेहरे पर खुशियों की बात दिखा गयी
खेतों में फसल जम कर लहरा गयी
खेतिहर झूम उठे,ऐसा प्यार दिखा गयी

आज ये पल अपना सा लगता है
खेतों में,ये दिन सपना सा लगता है
मेहनत का रंग,ये सपना सा लगता है
इंसान का दिल आज सपना सा लगता है

खेतो की हरियाली से
दिल की गहराइयों से

आसमानों की लहर कब छू कर जाती है?
किसानों पर कब बरस कर जाती  है?
खेतों में कब  लहर कर आती है?
मेहनत का रंग कब दिखा कर जाती है?

खुब तोड़ दिये थे,अंगों का रंग
इसको पाने की खुशी में
खुब जोड़ दिये थे,उसकी चाहत में
उसके करीब जाने में

रचयिता:रामअवध


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