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नफ़रत की द्वार

*कविता*नफ़रत की द्वार

घृणा से भरे लोग है यहाँ
जिंदगी वाले चोर है यहाँ

सच को सब छिपा लेते है
झूठ को सब दिखा देते है
ये समय की लहर आया है
जिंदगी में ऐसी कहर छाया है

झूठे वादे बहुत चलते है
वक्त के आगे सब बदलते है
जिंदगी में सबके पीछे ढलते है
अपनी घृणा काम रखते है

ये नफरतों की दुनिया है
सबको इससे बचना है
ये चाहतों की दुनिया है
सबको इससे चाहना है

दीवार के पीछे बुराईयाँ बताते है
बिना कहे ही सब कुछ कह जाते है
चापलूसी की दुनिया में,हम ना टिक पाते है
नफ़रत की दुनिया में,हम ना बस पाते है

सच कह कर जाती है शंका
मिटा देती है साँसो की अंका
हमें तो शंक से अलग रहना है
ज़िंदगी की राज़ में खो जाना है

रचयिता:रामअवध





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