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वक्त भी सीखाती है

*कविता*वक्त भी सीखाती है

यादें भी कुछ सीखाती है
बीते हुए पल को बुलाती है
ज़िंदगी की बातें दोहराती है
यादों की ज़िंदगी सताती है

लोभ की नगर में ये जग झुकता है
ख़ौफ़ की नज़र में ये मन दुखता है
चाहत की नज़र में अब आने लगी
ज़िंदगी की शजर में अब जाने लगी

तिमिर की छाया पकड़ लिया
जिंदगी की माया जकड़ लिया
शरण की ज़िंदगी में छा गया हूँ
लड़प्पन की यादों में आ गया हूँ

लोग सच कहा करते थे
यादें में बोलता करते थे
वक्त के बारे बताया करते थे
ज़िंदगी की राज़ सुनाया करते थे

ज़िंदगी की यादें भी बोलती है
बीते ज़िंदगी को भी जोड़ती है
ज़िंदगी की माया भी सताती है
बीते यादों में भी हमें सीखाती है

ज़िंदगी की सफ़र हमसे कुछ कहती है
मुलाक़ातों की डगर में हमे खुश रहती है
खामोशियों की चादर हम पर भी आती है
सनसनाहट की बातें हम पर भी छाती है

रचयिता:रामअवध


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