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रखता हूँ

*कविता* रखता हूँ

वक्त की तलाश करता हूँ
अपनी उल्लास रखता हूँ
ज़िंदगी की पहचान रखता हूँ
उड़ते पंरिदों पर शान रखता हूँ

डाल पर पंक्षियों की कतार देखता हूँ
गाँव पर अपनी की उतार रखता हूँ
ज़माने की ज़िंदगी में मुलाक़ात रखता हूँ
ख्वाहिश की ज़िंदगी में शौहरत रखता हूँ

बीते पलों की यादें आज भी रखता हूँ
ख्वाबों की तलाश आज भी करता हूँ
जिंदगी की बातें आज भी दोहराता हूँ
बीते पलों के पीछे आज भी चला जाता हूँ

लोग आज भी मुझसे रूठ जाते है
ज़िंदगी की सच जानने टूट जाते है
मेरी मुलाक़ात पर पहचान नही रखते
वक्त की चादर पर ख्याल नही रखते

ज़िंदगी की तलाश करता हूँ
कुदरत की पहचान रखता हूँ
उड़ते पंरिदों पर जहान रखता हूँ
कुदरत की गोद उनकी जान रखता हूँ

रचयिता:रामअवध


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