दुआओ में माँ

*कविता*दुआओ में माँ

लाखों दुआये मेरी माँ देती है
दुओ के पल में माँ मेरी रहती है
माँ के पल मेरी शान बसती है
माँ का आँचल मेरी जान देती है

कहने को मेरी जान कहलाती है
सच में मेरी साँसों में मेरी माँ आती है
माँ दुआओ में मेरी साँस चलती है
उन्हीं की यादों में मेरी शान बसती है

माँ की आवाजें कहा करती थी
जीने की सच्चाई बताया करती थी
ज़िंदगी में चलना सीखाया करती थी
दुनिया की बुराई से बचाया करती थी

मैं आज भी माँ के चरणों झुक जाता हूँ
मैं आज भी माँ के चरणों बस जाता हूँ
मैं आज भी माँ के चरणों सो जाता हूँ
मैं आज भी माँ के आँचल में बस जाता हूँ

कागज के पन्नों में कही बार माँ लिख लेता हूँ
जहाँ बैठा यादों वही माँ को पुकार लेता हूँ
जहाँ जाता हूँ वही माँ की यादें चली आती है
छाया की तरह ज़िंदगी में साथ नही छोड़ती है

रचयिता:रामअवध

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