दूर खड़े

*कविता*दूर खड़े

दूर खड़े अँधेरे में
उजाले की तलाश कर रहे है
अपनी ख्वाहिश में
ज़िंदगी की उल्लास भर रहे है
 
विपत्ति भी हमें कुछ सीखाती है
नर की परख वही तो करवाती है
धैर्य की शान हमें वही तो दिखाती है
हिम्मत की तलाश वही करवाती है

बिना प्रयास के हथियार नही मिलता
बिना प्रदान के आकार नही दिखता
सफलता के पीछे कोई राज़ नही दिखता
ज़िंदगी में कोई ऐसे ही इतिहास नही लिखता

वक़्त अब बदल जायेगा
जीना अब शजर जायेगा
वक्त के साथ रहना पडे़गा
ज़िंदगी के साथ चलना पडे़गा

ढलते सूरज की लालिमा देखना
उगते सूरज की मनोहर देखना
सूरज की चमक भी कुछ सीखाती है
ढलते वक्त में भी हमें कुछ दिखाती है

रचयिता:रामअवध



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