तेरे पल

*कविता*तेरे पल

ये तेरी आँखें ही तो है
जो मुझसे बातें करती है
ये तेरी मुस्कान ही तो है
मुझे उल्लास से भर देती है
तेरी बीते पलों की यादें तो है
जो मुझे संभार कर रखती है

तेरी नयनों का पलक पढ़ लेता हूँ
इशारे में तेरी इक़रार देख लेता हूँ
मैं आज भी तेरी बातों को दोहराता हूँ
तेरे ही अतीत को अपने पास बुलाता हूँ

ये हवायें तेरी ही आहट गुनगुनाती है
भूलने जाने पर तेरी अहसास दिलाती है
कई बार मुझसे तेरी राज़ कह जाती है
उस पल में मेरी आवाज़ कुछ कह जाती है

कब?-तक तेरी यादों को संभाल कर रखूँगा
कभी तो तेरी यादों में टूट ही जाऊँगा
ज़िंदगी के पन्ने कभी तो मिट ही जायेगा
वक्त के आगे कभी तो मैं गिर ही जाऊँगा

खुद को बेकरार समझता हूँ
कही तो खोया सा रहता हूँ
ना जाने किसके वक्त में रहता हूँ?
संसार से कही दूर बसता हूँ

रचयिता:रामअवध


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