future

मृत्यु हूँ,मैं

*कविता*मृत्यु हूँ,मैं

मैं अनजान रहता हूँ
आने पर मृत्यु लेता हूँ
मैं ख़ामोश रहता हूँ
वक्त में अटल रहता हूँ

लोग भूल जाते है साँसों का टूटना
क्यों? रूठ जाते है जिंदगी में रूठना
मैं अविचल नही हूँ,बेख़ौफ़ की छाया हूँ
मैं जब भी आता हूँ,ख़ामोश कर जाता हूँ

मेरे आने से खामोशियाँ आ जाती है
मेरे जाने से ज़िंदगी बढ़ जाती है
मैं ह्रदय की द्वार तोड़ जाता हूँ
ज़िंदगी की साँस बन्द कर देता हूँ

तिमिर की माया हूँ मैं
उजाले की छाया हूँ मैं
मैं चेतन का पुकार हूँ
मैं चेतन को बुलावा हूँ

मैं ही तो मृत्यु का चादर हूँ
जो आ जाये उसकी सादर हूँ
कहने को मेरे पास जान है
रहने को मेरे पास जहान है

रचयिता:रामअवध



Post a Comment

0 Comments