वक्त की माया

*कविता*वक्त की माया

वक्त की छाया दिखती नही
नभ की माया बिकती नही
ज़िंदगी का पल लिखी जाती है
ज़िंदगी की यादों रखी जाती है

ज़िंदगी में दिखती है पंरिदों की कतार है
आसमान पर खिलती है पंख की उतार है
ज़िंदगी भी उड़ते पंरिदों की तरह दिखती है
आसमानों पर लिखी बातों वह भी गिनती है

किन हवाओं के साथ प्रीत लाऊँगा
जिंदगी के यादों साथ नीत लाऊँगा
थोड़ी ज़िंदगी अब में कहाँ?बीताऊँगा
यादों के साथ अब में कहाँ रह पाऊँगा

इस जहान को देखकर रहना पड़ेगा
ज़िंदगी में खुशी के पल जीना पड़ेगा
सभी के साथ मिलकर रहना पड़ेगा
उन्ही के वक्त में मुझे जुड़ना पड़ेगा

जिंदगी में कुछ करना पड़ेगा
किसी के यादों में रहना पड़ेगा
उसी के ख्याल में जीना पड़ेगा
उसी के ख्वाहिश में बसना पड़ेगा

रचयिता:रामअवध




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