मन ही तो है जो

*कविता*मन ही तो है जो 

मन कभी ठहरता ही नही
वक्त कभी बदलता ही नही
सोच की जग में डूबा देता है मुझे
वक्त के क्षण में छिपा लेता है मुझे

मन ही तो है जो
मुझे बार-बार बोलती है
ज़िंदगी तो है जो
मुझे बार-बार तोलती है

मन कही दूर ले जाता हैं
सुबह के नूर छोड़ आता है
वक्त की यादों में खो जाता हूँ
ज़िंदगी की वादों में आ आता हूँ

खुशी के पल दिखाता है
जीने की डगर बताता है
ख्वाबों की नगर बसता है
मन कही ओर ठहरता है

ये मन ही तो है
जो दूर कही ले जाती है
ये जून ही तो है
जो यादों में छोड़ आती है

रचयिता:रामअवध

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