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kavitagelaxy

सवेरा ये जागा,वक्त ये भागा

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"Author Poems:Ramavadh
रचयिता:रामअवध
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कविता ही कविता"

चल उठ सवेरा ये भागा है
चल दौड़ समय ये जागा है
पकड़ लो ये नभ का धागा
जकड़ लो ये वक़्त का रागा

चल नींद खोल सूरज सर पर आया है
चल जिद्द जोड़ ख़्वाब तुझे दिखाया है
कुदरत ने तुम्हें जागाया है संसार तुम्हें दिखाया है
ये वक्त ने तुम्हें उठाया है भविष्य  तुम्हें बताया है

कल की  सोच में ना डूबों तुम
निराशा के आगे ना झुकों तुम
ख्वाबों को कभी ना भुलो तुम
जिंदगी के आगे ना रुको तुम

छोड़ दो तुम दागने की दुनिया
छोड़ दो तुम भागने की दुनिया
छोड़ दो तुम आरामों की दुनिया
छोड़ दो तुम हरामों की दुनिया
छोड़ दो तुम शर्म की दुनिया
छोड़ दो तुम धर्म की दुनिया

रचयिता:रामअवध




खुद की रोशनी बनो,कही छिपों मत

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"Author Poems:Ramavadh
रचयिता:रामअवध
kavitagelaxy.in
कविता ही कविता"

खुद का सूरज छिपा नही,जिन्दगी कही दिखा नही
खुद में कही छिपा नही ,चुपचाप में कही रुका नही
इंसानों में अब दिखा नही,परछाई में अब छिपा नही
जिंदगी में कही रुका नही,लिखनें में कही चुका नही

खुद की रोशनी दिखी नही,यादों में कही छिपी नही
जीवन की प्यास बुझी नही, यादें में कही रुकी नही
मन की ख़्वाब कही बाँधी नही,जीवन कही रुकी नही
हर पल याद रही नही,जिंदगी में कोई बात रही नही

बाँध चुके थे ये शृंगार
बाँध गये थे ये संसार
लहर चुके थे ये इंसान
कहर गये थे ये भगवान

जिंदगी में प्यासे सभी लोग लगते है
ईश्वर को पुकारने में सभी लड़ते है
जिंदगी के दिवाने सभी लगते है
झुठे वाचन  सभी लोग बोलते

धूल की हवा थी,जीवन में निराशा थी
धूप की चमक थी,बेरोजगारी में नशा थी
मन में बेचैन थी, जिंदगी की शीशा  थी
बेमन की रात थी,जिदंगी भी एक लाश थी

रचयिता:रामअवध

चलो-चलो कुदरत की ओर

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"Author Poems:Ramavadh
रचयिता:रामअवध
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कविता ही कविता"

चलो जिंदगी की ऊँचाई देखने
चलो ख्वाबों की चाहत देखने
चलो यादों की बरसात देखने
चलो कुदरत की पहचान देखने

कही दूर ठहरने चले
कुदरत के पल रहने चले
जीवन की सफर में रहने चले
अनदेखी सी राहों बसने चले
खुद को हौसले में डालने चले
सूरज को छिपते देखने चले

रात वही गुजारने चले
सवेरा वही देखने चले

चलो ऊँचाई की नाप देखने
चलो जिंदगी की ताज देखने
चलो जीवन की राह देखने
चलो आज अतीत को देखने
चलो आज भुले यादों को देखने

पोखरे  में मेंढक की छलाँग देखे
वही जीवों  की कतार देखे
वही कुदरत की जहान देखे
आनंद जिंदगी की प्रहार देखे
जिंदगी की वही  उड़ान देखे

जिन्दगी की बरसात देखी
वही जीवन की तलाश देखी
ख्वाबों की जहान देखी
नींद भरी रात देखी
वही सुन्दर जहान भरी देखी
वही दिल भरी रात देखी
वही दिल की चाहत देखी

"शहर में आने के बाद"
तड़प रही थी जिन्दगी
नरक रही थी जिन्दगी
सोच रही थी जिन्दगी
बेचैन रही थी जिन्दगी

रचयिता:रामअवध



प्रेम से ही प्रेम होता है

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"Author Poems:Ramavadh
रचयिता:रामअवध
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कविता ही कविता"

प्रेम भी हमें  कुछ सिखाती है
ज़िंदगी का रा़ज हमें बताती है
स्वयं की दीवार हमें सताती है
जीवन की राज़ हमें बताती है

जीवन का शृंगार भी है प्रेम
जिंदगी का इम्तिहान भी है प्रेम
खुद में लाचार भी है  प्रेम
खुद में पहचान भी है प्रेम
दिल पर प्रहार भी है प्रेम
जिंदगी में सुधार भी है प्रेम
मोहित कर दे, यह भी है प्रेम

प्रेम की भाषा हमें बताती है
जिंदगी की सुधार हमें सिखाती है
खुशी की जिंदगी हमें जीआती है
प्रेम ना होने पर हमें बहुत सताती है
अकेली जिंदगी में बहुत रुलाती है

खुशियों को उछालकर दिखाती है
दिल को बहका कर दिखाती है
दिल को महका कर दिखाती है
मन को हरण करके दिखाती  है

रचयिता:रामअवध

गुंजता है,ये दिल

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"Author Poems:Ramavadh
रचयिता:रामअवध
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कविता ही कविता"
गुंजता है, ये दिल  किसी के प्यार में
धड़ता है, ये दिल उसी की याद में
बोलता है,ये दिल कविता का प्यार में
झुकता है, ये दिल उसी के ख़्वाब  में
जोड़ता है,ये दिल उसी के यादों में
सोता है, ये दिल ख़्वाहिश की रातों में
जागता है,ये दिल रातों की प्यार में

नयी उम्मीद,नयी जान बन जाओ तुम
नयी उम्दा,नयी शान बन जाओ तुम
नयी सोच,नयी पहचान बना दो तुम
नयी सुबह,नयी जान बन जाओ तुम
हमारे ख्यालों की रानी बन जाओ तुम

मेरी जान की ज्योत बन जाओ तुम
मेरी जिंदगी की उम्मीदवार बन जाओ तुम
मेरी ख्वाहिश की लाज रख लो तुम
मेरी जिदंगी में ये बात रख लो तुम

धोखा नही,मौका देकर रखूँगा तुम्हें
ख़्वाबों नही,ख्वाहिश में रखूँगा तुम्हें
पल में नही,दिल बसाकर रखूँगा तुम्हें
दुख नही,सुख देकर रखूँगा तुम्हें


रचयिता:रामअवध

वक्त भी कुछ सीखा कर जाती है

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"Author Poems:Ramavadh
रचयिता:रामअवध
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कविता ही कविता"

ये वक्त सब कुछ लुटकर चला गया
मुझे कुछ समझाकर निकल गया
ये वक्त का दर्पण मुझे दिखा गया
मुझे नये वक्त में छोड़कर चला गया

लोगों ने मुझे धोका दिया
वक्त ने मुझे मौका दिया
लोगों ने मुझे रोक दिया
मेहनत ने मुझे जोड़ दिया

वक्त भी कुछ सीखाती है
लोगों की पहचान भी बताती है
वक्त के आगे इम्तिहान भी लेती है
वही समय इंसानियत भी दिखाती है

वक्त भी लोगों को पहचानती है
उन्हीं के वक्त में उन्हें झुकाती है
वक्त आने पर उन्हीं को बताती है
लोगों की रफ्तार भी दिखाती है

ये हवा भी कुछ कहकर जाती है
सामने होने पर ऐहसास दिखाती है
वक्त के साथ घुमकर दिखाती है
मौसम में रंग बदलकर दिखाती है
दी गयी मिट्टी का ऐहसास दिखाती है

रचयिता:रामअवध

मीराबाई कृष्ण की राग बनी

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"Author Poems:Ramavadh
रचयिता:रामअवध
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कविता ही कविता"

कृष्ण की बाँसुरी बनी हूँ मैं
संग उसके साथ प्रीत लगाई हूँ मैं
कन्हैया के स्वर में जीऊँगी मैं
जीवन में उन्हीं की राग बनूँगी मैं

प्रेम की गीत उन्हीं की गाती जा रही हूँ
जीवन त्यागकर उन्हीं के हवाले जा रही हूँ
खुद में ही कृष्ण की ख़्वाब देखती जा रही हूँ
अंधेरी डगर में उन्ही की गीत गाती जा रही हूँ

राहों में कन्हैया को पुकारती जा रही हूँ
मेरी ध्यान कन्हैया के चरण में जा रही हूँ
कन्हैया-कन्हैया कह-कह कर पुकार रही हूँ
कन्हैया की मूर्ति उन्हीं की साथ लेती जा रही हूँ

राजमहल छोड़कर कन्हैया के प्रेम आ गयी हूँ
ये जीवन त्यागकर उन्हीं के हवाले कर चुकी हूँ

कन्हैया को ढूँढती हूँ,बाँसुरी के धुन में
 प्रेम भागी चली आती हूँ,नंगे पाँव में
खुद को ढूँढती हूँ संत कबीरदास में
संत बनी हूँ, मैं कन्हैया के प्यार  में

कन्हैया के मूर्ति में मोहित हो जाती हूँ मैं
खुद को नाचे बिना रोक ना पाती हूँ मैं

रचयिता:रामअवध